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परछाई,महबूबा यूँही नहीं तुम पर मरेगी

एक दिन परछाइयां जरुर बोलेगी, अनल बर्फ के आंसू जरुर घोलेगी, समीर को न गिला न शिकवा होगा, ना बदरिया का कोई सिलसिला होगा | जब ये कायनात डग–मग डोलेगी, फुर से चिड़िया दाना चुगकर, खुले आसमां में छम–छम तेरेगी, तुम ताकते रहना नदी किनारे, मछली सारे रजिया के राज खोलेगी | कलियों की कहानी पुरानी […]