Romantic Thirst Poetry: जाने किस बरसात,बुझेगी मेरी प्यास

उसकी याद दिलाती हे ,

उसका चेहरा बताती हे,

मंद-मंद बहते हुए यूँ

गुनगुनाती हे उसका नाम,

ये ढलती हुई शाम |

Romantic Thirst Poetry in Hindi

उसके प्यार का विश्वाश दिलाती हे,
उसके प्यार का एहसास दिलाती हे,
चोरी-चोरी,चुपके -चुपके यूँ
मुजको सुनाती हे उसका पैगाम,
ये ढलती हुई शाम |

 

धीरे-धीरे से ढलती जाती हे,
उसका हर हाले दिल सुनाती हे,
कभी मै ना मिलूं उसको तो  यूँ 
मचा देती हे भयंकर कोहराम,
ये ढलती हुई शाम |
किरणों में उसकी आँखे चमकती हे,
हर तरफ सिर्फ उसकी झलक छलकती हे,
ऐसे -वैसे बलखाती,लहराती यूँ
मेरे दिल को देती हे सुकून-ओ-आराम,
ये ढलती हुई शाम |
मुज पर शबनम-सी छा जाती हे,
मुझे अपने में समाँ लेती हे ,
हर घड़ी हर पल हर लम्हा यूँ
उसकी मोहब्बत का पिलाती हे जाम,
ये ढलती हुई शाम |

 

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