Desi Hot Poetry: महबूबा यूँही नहीं तुम पर मरेगी

Desi Hot Poetry: महबूबा यूँही नहीं तुम पर मरेगी

Desi Hot Poetry in Hindi

एक दिन परछाइयां जरुर बोलेगी,
अनल बर्फ के आंसू जरुर घोलेगी,
समीर को न गिला न शिकवा होगा,
ना बदरिया का कोई सिलसिला होगा |
 
Desi Hot Poetry
 

जब ये कायनात डगमग डोलेगी,

फुर से चिड़िया दाना चुगकर,
खुले आसमां में छमछम तेरेगी,
तुम ताकते रहना नदी किनारे,
मछली सारे रजिया के राज खोलेगी |
 
कलियों की कहानी पुरानी हो गई,
अब गलियों में जवानी दीवानी हो गई,
शबनम से अब हाला नहीं भरेगी,
शराबियों से अब शराब नहीं डरेगी |

 

तुम आइना क्यों देखते हो-
महबूबा युहीं नहीं तुम पर मरेगी,
थोड़ी घड़ियाँ थामकर चलो यारों,
इनकी कदमकदम पर जरुरत पड़ेगी |

 

एक दिन परछाइयां जरुर बोलेगी,
अनल बर्फ के आंसू जरुर घोलेगी.
 

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