Full moon Time 2022: सुपरमून जुलाई माह में 3 दिन तक दिखाई देगा. नासा (National Aeronautics and Space Administration) के अनुसार, साल 2022 का ये सबसे बड़ा सुपरमून (Full moon Time 2022) इस सफ्ताह तीन रातों तक दिखाई देगा. अंतरिक्ष एजेंसी (NASA) ने कहा है कि, ‘चंद्रमा इस समय के आसपास लगभग तीन दिनों तक, मंगलवार की सुबह से शुक्रवार की सुबह तक आसमान में नजर आएगा.
Full moon Time 2022
नासा के अनुमान से यह ‘ बुधवार (13 जुलाई) को सुबह 5:00 बजे एड (Eastern Daylight Time) / (2:30 PM IST), चंद्रमा 2022 के लिए पृथ्वी के अपने निकटतम बिंदु पर पहुंचेगा – जो 357,264 किलोमीटर की दूरी पर है. जानकारी में नासा ने कहा कि बुधवार की शाम तक, शाम 9:44 बजे EDT (Eastern Daylight Time)/ (सुबह 7:14 बजे IST) समाप्त हो जाएगा, पूर्णिमा दक्षिण-पूर्वी क्षितिज से 5 डिग्री ऊपर दिखाई देगी.
जुलाई 2022 का फुलमून (Super Moon 2022) इस साल किसी भी अन्य पूर्ण चंद्रमा की तुलना में पृथ्वी के करीब परिक्रमा करता है, जिससे यह 2022 का सबसे बड़ा और सबसे चमकीला सुपरमून बन जाता है. अपने निकटतम बिंदु पर, बक मून पृथ्वी से 357,264 किमी दूर होगा, इसलिए यह जून के स्ट्राबेरी (Straberry) चंद्रमा से बाहर निकल जाता है.
सबसे खास बात आज गुरुपूर्णिमा में भी है. गुरुपूर्णिमा ऋषि वेदव्यास जी कि जयंती के उपलक्ष्य में मनाई जाती है. आइए जानते है, वेद व्यास जी के जीवन से जुड़ी कुछ ख़ास बातें…
Guru Purnima Top 11 Secrets
1) इस दिन हिन्दुओं के गुरु महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास (वेद व्यासजी) का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन को गुरुपूर्णिमा के रूप में मनाते है।
2) गुरुपूर्णिमा के दिन विद्यार्थी और बच्चे अपने गुरुओं का आशीर्वाद लेते है, ताकि उनका जीवन सफल हो सके।
3) वेदव्यास जी ने महान ग्रन्थ महाभारत की रचना की थी। वे उन सभी घटनाओ के साक्षी भी थे, जो महाभारत काल में घटित हुई।
4) श्री वेदव्यास की माता का नाम सत्यवती और पिता का नाम ऋषि पराशर था। उनके 3 भाई-बहन और एक पुत्र था।
5) वेदव्यासजी ने अपनी दिव्य दृष्टि से चार वेदों की रचना की थी जिनके नाम ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद है।
6) वेदों, धर्म ग्रंथो, और महाभारत के महान रचयिता महर्षि व्यासजी का मन्दिर व्यासपुरी में है जो काशी से लगभग 5 मील दूर है।
7) उस कालखंड में व्यासजी के पांच महान शिष्य हुए, जिनके नाम रोम हर्षण, सुमन्तुमुनि, वैशम्पायन, पैल और जैमिन थे।
8) भारतीय इतिहास में संस्कृत साहित्य में वाल्मीकि ऋषि के बाद वेद व्यास ही सबसे सर्वश्रेष्ठ और महान कवि हुए हैं।
9) काशी के रामनगर दुर्ग में वेदव्यास जी की सबसे प्राचीन मूर्ति विराजमान है, जिसे जनता छोटा वेदव्यास के नाम से जानती है।
10) वेदव्यास जी ने काशी को श्राप दे दिया था, जिसके कारण विश्वेश्वर ने उन्हें काशी से निकाल दिया था।
11) माघ माह में हर सोमवार को गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में मेला लगता है, जिसे व्यासजी की जयन्ती के रूप में मनाया जाता है.
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