Drought in India Poetry: कहाँ जाकर प्यास बुझाऊ मै

Drought in India Poetry in Hindi
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Drought in India Poetry

लेकर अपने सूखे कंठ को

किस दरिया किनारे जाऊं मै,

सूखे-सूखे इन होठों को बताओ,

कहाँ जाकर तरबतर कर आऊं मै |

देखकर पानी पर पापी पॉलिटिक्स,
मन ही नहीं, अरमान भी सुख गए मेरे,
समंदर कर दिया हवाले तुम्हारे,
फिर-भी बूंद-बूंद को तरसते है सारे,
गीली धरती को सुखा बना रहे है,
हो-हल्ला मचाकर, बस जता रहे है,
प्यासों की आँखों में आसुओं का सैलाब ला रहे है |
 
अनमोल का मोल लगाकर,
कुदरत के अमूल्य तोहफ़े को,
सरे-राह नीलाम कर रहे है,
अब तुही बता ऐ ग़ालिब…. 
“कहाँ जाकर प्यास बुझाऊ मै…?”
 
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