Life & Death Poetry: मै तो पैदा ही मरने के लिए हुआ हूँ

Life & Death Poetry freaky funtoosh
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Life & Death Poetry

>>>मौत<<<<

मंदिर भी गया, मस्जिद भी गया,

पूजा भी की, नमाज भी पड़ी,

चर्च भी गया, गुरुद्वारा भी गया,

प्रार्थना भी की, गुरुवाणी भी सुनी,

चारों धाम भी गया, हज-हवन भी किया,

गीता भी गाई, कुरान भी इबादत में आई,

संतों की शरण भी ली, सन्यासी का वेश भी धरा,

दर-दर भिक्षा भी मांगी, घर-घर दुआ भी दी,
धुनी भी रमाई, पाखंडीगिरी भी दिखाई,
कण-कण में खोकर, कण-कण हो गया,
नदियाँ, पर्वत और जंगलों में भ्रमण हो गया,
हरा-भरा शारीर मांस का, हाड़-सा कड़क हो गया,
शून्य से चला था, लो पूरा शतक हो गया,
और अंत में मिला क्या ???
>>>>मौत<<<<

हाइलाइट्स

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Life & Death Poetry

 
 
 
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