Sun Rise Poetry: सिसकती साँसों से पूछो,मेरा क्या है?

Sun Rise Poetry freaky funtoosh Hindi
Sun Rise Poetry freaky funtoosh Hindi
Views: 18
0 0
Read Time:49 Second

Sun Rise Poetry in Hindi

सिसकती साँसों से पूछो,
वक्त का पहरा क्या है ?
रजनी लपेटे सफेदी में,
शशि में इतना,
गहरा क्या है?
 
है भान नभ के,
भानु प्रताप को,
लबों पे लालिमा लिए,
सवेरा क्या है?
क्यूँ गुलशन करता,
नाज इतना शुलों पे,
है एहसास गुलों को,
भंवरों का पहरा क्या है?
 
क्षितिज को साहिलों से मिलाती,
सागर पे लहराती,
सरगमसी लहरों का,
बसेरा क्या है?
 
माटी से माटी तक का सफ़र,
जानता है सिर्फ वो कुम्हार,
कि इस खोखले खिलौने का,
चेहरा क्या है?
Read more interesting stuff…

Life living poetry: ये साली ज़िन्दगी…

Lucky Donkey Poem: एक गधे की कहानी, कविता की जुबानी !

Happy
Happy
%
Sad
Sad
%
Excited
Excited
%
Sleepy
Sleepy
%
Angry
Angry
%
Surprise
Surprise
%
CLICK  Hindi Poem: हाय तेरे होठों की लाली

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published.