Romantic Rainfall Poetry: वो यूँही नही भीगने लगी बरसातों में

Romantic Rainfall Poetry: वो यूँही नही भीगने लगी बरसातों में
वो यूहीं नहीं भीगने लगी बरसातों में,
शायद बारिशों ने उसके बदन को यूँ छुआ होगा,
एहसास-ऐ-इश्क भी कोई मंजर है यारों,
उसने कुछ तो सोचा होगा,
उसने कुछ तो सोचा होगा !

Romantic Rainfall Poetry on Woman

वो यूहीं नहीं कजरा लगाने लगी आँखों में,
शायद निगाहों ने उसे इशारा किया होगा,
ख्वाब यूहीं नहीं पलते पलकों पे  यारों,
उसने कुछ तो सोचा होगा,
उसने कुछ तो सोचा होगा !
वो यूहीं नहीं लाली लगाने लगी लबों पे,
शायद होटों ने उसे उकसाया होगा,
मुस्कराहट यूहीं नहीं छलती यारों,
उसने कुछ तो सोचा होगा,
उसने कुछ तो सोचा होगा !
वो यूहीं नहीं गजरा लगाने लगी गेसुओं में,
शायद गुलशन ने उसे बहकाया होगा,
क्यूँ खुशबू फ़िदा है हवाओं पे यारों,
उसने कुछ तो सोचा होगा,
उसने कुछ तो सोचा होगा !
वो यूहीं नहीं मटक कर चलने लगी राहों में,
शायद इस “अज्ञात” पर उसे विशवास होगा,
वरना राहें भी बड़ी शातिर होती है यारों,
उसने कुछ तो सोचा होगा,
उसने कुछ तो सोचा होगा….अरुण “अज्ञात” पंचोली
 
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