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Old Age Romantic Poetry: महज चेचिस पर ही झुर्रियों ने ली…

Old Age Romantic Poetry in Hindi महज चेचिस पर ही झुर्रियों ने ली अंगड़ाई है महज हाड़-मांस में ही कल-पुर्जों की हुई घिसाई है बाखुदा मोहब्बत तो आज भी कतरे-कतरे में उफान पर है इस नामुराद जमाने ने हम पे […]

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