Human Nature: फर्श से अर्श तलक का फासला

Human Nature: फर्श से अर्श तलक का ये विचित्र-सा फासला बार-बार अनवरत यह सोचने पर बेचैन करता है,कि मानवता की इस श्रृंखला को किन सर्वस्व अवधारणाओं से परिभाषित करूँ या चिन्हित करूँ | महज मुखोटों की तर्ज़ पर या फिर ह्रदय-स्थल की भावभंगिमाओं पर मानवता रूपी इश्वर की इस तिलिस्मी और बेहद पेचीदा कलाकृति का आंकलन या अवलोकन नहीं किया जा सकता |   जहां तथाकथिक इश्वर को सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड ने अपना पालनहार माना है वहीँ इश्वर ने एहसासों और विश्वासों को आधारबिन्दु घोषित कर खुद के होने का प्रमाण…

Read More