मै उसकी अदाओं का आशिक,तुम कौन

तितलिओं पर सवार हो,उड़ती हुई आएगी वो, गुलशनो से गुलों का अर्क लबों पे समेट लाएगी वो, तड़पायेगी,तरसाएगी,और थोड़ा गुरुर में गरमाएगी वो, चुपके से विरानो में, हल्के से कानो…