ऐ ग़ालिब तेरे शहर में,ये कैसी गरमी?

ऐ ग़ालिब तेरे शहर में ये कैसी गरमी है कहीं इंसानियत पे अत्याचार तो कहीं हेवानियत और बेशर्मी है किसे बयां करूँ ? ये शब्दों की सहानुभूति… कहीं मासूमों से बलात्कार तो…