Tag: Mother’s womb Poetry

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Mother’s womb Poetry: अच्छा लगता था माँ की कोख में

Mother’s womb Poetry: अच्छा लगता था माँ की कोख में

Mother’s womb Poetry आँखे खुलते मैंने ये क्या देखा— कोई डूबा हुआ है शौक में, कोई रो रहा है रोग में, कोई भोंक रहा है भोग में, कोई तड़प रहा…