Ramadan Eid poem: आपको मुबारक हो माहे-रमजान

Ramadan Eid poem in hindi मेरी अजीज़ अम्मी, मेरे अजीज़ अब्बूजान   मेरी प्यारी आपा, मेरे प्यारे भाईजान तुम सब को मुबारक हो माहे-रमजान… तुम सब को मुबारक हो माहे-रमजान…|   निगाहों को था जिसका बेसब्री से इंतज़ार माहे-रमजान के लिए हर शख्स था बेकरार लो आसमां में निकला चाँद, हो गए दीदार | तुम सब को मुबारक हो माहे-रमज़ान… तुम सब को मुबारक हो माहे-रमज़ान…|     इसी माह में अवतरित हुआ था पाक कुरान, इसीलिए फरमाते है इसको माहे-रमज़ान, खुदा के बन्दे नेकी करें और बदी से टलें,…

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