कहाँ जाकर प्यास बुझाऊ मै

लेकर अपने सूखे कंठ को किस दरिया किनारे जाऊं मै, सूखे-सूखे इन होठों को बताओ, कहाँ जाकर तरबतर कर आऊं मै | देखकर पानी पर पापी पॉलिटिक्स, मन ही नहीं,…